अंतिम विदा
कॉलेज में एग्जाम्स शुरू हो गए थे, बच्चों के हाथों में किताबें दिखनी शुरु हो गईं थी, इंजीनियरिंग कॉलेज में किताबों की शक्ल एग्जाम से पहले वाली रात को ही देखी जाती हैं। राहुल और उसके दोस्तों में भी अब पढ़ाई लिखाई की बातें शुरु होने लग गई थी। राहुल को तो बस जल्दी से परीक्षा खत्म होने का इंतज़ार था, वो बस घर जाना चाहता था विशेषकर अपनी दादी से मिलने। उसे याद था की जब शहर से दूर उसका एडमिशन इस इंजीनियरिंग कॉलेज में हुआ था तब उसकी दादी किस तरह उस से बिछड़ने को लेकर रोई थी। इसलिए राहुल को जब भी कॉलेज से छुट्टी मिलती तो वो घर के लिए निकल पड़ता था। दिन बीते ओर देखते ही देखते आखिरी एग्जाम का दिन आ गया, सब लोग बस इसी दिन का इंतज़ार करते थे। एग्जाम के बाद राहुल सीधे अपने हॉस्टल के कमरे पर आया और घर जाने के लिए जल्दी जल्दी अपना सामान जमाने लगा। तभी उसके दोस्त राम का फोन आया उसने कहा की वो और दीपक भी आज ही जा रहे है तो हम सब एक साथ ही शाम की बस से चल लेंगे। राम और दीपक राहुल के बहुत अच्छे दोस्त थे और वे तीनों थे भी एक ही शहर के, तो राहुल ने हाँमी भर दी। सामान जमा कर राहुल ने अपने पापा को खुद के आने क...